कम उम्र में भी दिल की बीमारियों का खतरा, लक्षणों को न करें नजरअंदाज : डॉ. सिमी मनोचा
फरीदाबाद। बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों की कमी, असंतुलित खानपान और बढ़ते मानसिक तनाव का असर अब हृदय की सेहत पर भी पड़ रहा है। पहले हृदय संबंधी बीमारियों को बढ़ती उम्र से जोडक़र देखा जाता था, लेकिन अब कम उम्र के लोगों को भी दिल से जुड़ी समस्याओं के प्रति सतर्क रहने की जरूरत है। समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार करके हृदय रोगों के जोखिम को कम किया जा सकता है। ग्रेटर फरीदाबाद सेक्टर-86 स्थित एकॉर्ड सुपर स्पेशलिटी अस्पताल की कार्डियोलॉजी विभाग की डायरेक्टर डॉ.सिमी मनोचा ने बताया कि हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, धूम्रपान और तनाव हृदय रोगों के प्रमुख जोखिम कारक हैं।
कई बार लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे समय पर बीमारी की पहचान नहीं हो पाती। सीने में दर्द या भारीपन, सांस फूलना, असामान्य पसीना आना, चक्कर आना और थोड़ी मेहनत में अधिक थकान महसूस होना जैसे लक्षणों को गंभीरता से लेना चाहिए। अचानक सीने में दर्द या सांस लेने में परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए रोजाना टहलना या व्यायाम करना, संतुलित आहार लेना, नमक और तले-भुने खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना तथा पर्याप्त नींद लेना जरूरी है। इसके साथ ही ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच करानी चाहिए। दिल की सेहत के प्रति जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय परामर्श गंभीर जटिलताओं के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
