गुरु शिष्य का संबंध दिव्य चेतना का परालौकिक मिलन : स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य
श्री सिद्धदाता आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी
फरीदाबाद। सूरजकुंड मार्ग स्थित श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम-श्रीसिद्धदाता आश्रम में मंगलवार को श्रद्धालुओं भीड़ उमड़ी। देसाई के दूरदराज से आए भक्तों समेत अनिवासी और प्रवासी भारतीय श्रद्धालुओं ने उत्साह और समर्पण भाव से गुरु पूर्णिमा महोत्सव मनाया। इन श्रद्धालुओं ने अपने श्रीसदगुरुदेव श्रीरामानुज संप्रदाय के तीर्थपीठ इंद्रप्रस्थ एवं हरियाणा पीठाधीश्वर अनंतश्री विभूषित श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के प्रति समर्पण भाव दिखाते हुए पूजा-अर्चना की। विदेशों और देश के विभिन्न प्रदेशों से आए श्रद्धालुओं की खासी भीड़ रही।
श्रीसिद्धदाता आश्रम के अधिष्ठता श्रीमद जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्रीपुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के सान्निध्य में स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज की समाधि पर पूजा अर्चना की गई। श्रीसिद्धदाता आश्रम में चल रहे श्री गुरु पूर्णिमा महोत्सव में बीते करीब एक सप्ताह से इस महापर्व में सम्मिलित होने और अपने आराध्य श्रीसदगुरुदेव के श्रीचरणों का पूजन करने के लिए देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि सुदूर विदेशों से भी भक्तों के आने का तांता लगा हुआ है। आश्रम में पधारे सभी श्रद्धालु श्रीसदगुरुदेव के श्रीचरणों में नतमस्तक होकर उनका अलौकिक पूजन, दर्शन और जीवन को धन्य बनाने हेतु आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं के बीच अपने प्रवचन में स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने कहा कि गुरु और शिष्य का संबंध परलौकिक है। यह संबंध दीक्षा से प्रारंभ होता है और जन्म जन्मांतर तक चलता है। गुरु पूर्णिमा शिष्य के जीवन में शरणागति का महापर्व है। ईश्वर के प्रति समर्पण भाव से श्रद्धालुओं का मन और इंद्रियों की शुद्धि होती है। बीते करीब 38 वर्षों से स्थापित श्रीसिद्धदाता आश्रम-श्रीलक्ष्मीनारायण दिव्यधाम ने लाखों लोगों को धर्म की राह पर चलने के लिए प्रेरित किया है। आश्रम में निरंतर चल रहे भक्ति, भजन, कीर्तन, प्रार्थना, सेवा, शिक्षा, पठन पाठन, स्वास्थ्य आदि प्रकल्पों से हजारों लोग लाभांवित हो रहे हैं। इस मौके पर सुमधुर भजनों से श्रद्धालुगण मंत्रमुग्ध हो गए।
