फरीदाबाद : यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद में डॉक्टरों ने एक 57 वर्षीय महिला के ब्रेन ट्यूमर की सफल सर्जरी कर उन्हें नई ज़िंदगी दी। यह ट्यूमर दिमाग के पिछले हिस्से में था, जो शरीर का संतुलन और चलने-फिरने की क्षमता नियंत्रित करता है। सफल सर्जरी के बाद मरीज को लंबे समय से हो रही चक्कर आने और सिरदर्द की परेशानी से काफी राहत मिली।
मरीज श्रीमती शंकुतला देवी पिछले काफी समय से तेज़ चक्कर आने, लगातार सिरदर्द और चलने में असंतुलन की समस्या से परेशान थीं। अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली में जांच के बाद वह इलाज के लिए यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-88 फरीदाबाद पहुँचीं। एमआरआई में पता चला कि उनके दिमाग के पिछले हिस्से में लगभग 5 × 6 सेंटीमीटर बड़ा ट्यूमर है। यह ट्यूमर दिमाग की एक बड़ी नस, ट्रांसवर्स साइनस, पर दबाव बना रहा था, जिससे सर्जरी और भी पेचीदा हो गई थी।
पूरी जांच के बाद न्यूरोसर्जरी टीम ने माइक्रोसर्जरी के जरिए ट्यूमर निकालने की योजना बनाई। दिमाग के इस हिस्से की सर्जरी, सबसे कठिन सर्जरी में मानी जाती है, क्योंकि यहां जगह बहुत कम होती है और ब्रेनस्टेम और दिमाग की नसें बेहद करीब होती हैं। इनमें थोड़ी सी भी चोट लगने पर गंभीर समस्याएँ आ सकती हैं और मरीज को हमेशा के लिए गंभीर दिमागी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
यह सर्जरी डॉ. भूपेंद्र फौजदार और डॉ. दीपक चौधरी ने की। उन्होंने पूरे ट्यूमर को एक साथ सफलतापूर्वक निकाल दिया और साथ ही आसपास के ब्रेन टिश्यू, ट्रांसवर्स साइनस और दूसरी महत्वपूर्ण नसों को सुरक्षित रखा।
डॉ. भूपेंद्र फौजदार, डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी, यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद, ने कहा, “यह ट्यूमर दिमाग के ऐसे हिस्से में था, जहां सर्जरी के दौरान हर कदम पर बेहद सटीकता बरतनी पड़ती है। ट्यूमर एक महत्वपूर्ण नस पर दबाव बना रहा था, इसलिए हमारा पूरा ध्यान इसे पूरी तरह निकालने के साथ-साथ आसपास की नसों और दिमाग के हिस्सों को सुरक्षित रखने पर था। सही योजना और पूरी टीम के तालमेल की वजह से हम यह सर्जरी सफलतापूर्वक कर सके।”
सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया की जिम्मेदारी डॉ. भावना जैन और डॉ. आरती ने निभाई। वहीं, सर्जरी के बाद डॉ. अभिषेक बंसल के नेतृत्व में न्यूरोक्रिटिकल केयर टीम ने मरीज की देखभाल और निगरानी की, जिससे उनकी रिकवरी बेहतर रही।
सर्जरी के तुरंत बाद मरीज को वेंटिलेटर से हटा दिया गया। उन्हें एक रात न्यूरो आईसीयू में निगरानी में रखा गया और अगले दिन वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया। दो हफ्ते बाद फॉलो-अप के दौरान मरीज ने बताया कि उनके चक्कर लगभग पूरी तरह बंद हो चुके हैं, सिरदर्द में काफी राहत है और अब वह पहले की तरह सामान्य रूप से चल-फिर पा रही हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि अगर लंबे समय तक लगातार चक्कर आएं, बिना वजह सिरदर्द बना रहे या चलने में परेशानी होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और सही इलाज से गंभीर दिक्कतों से बचा जा सकता है और मरीज के पूरी तरह ठीक होने की संभावना भी काफी बढ़ जाती है।
श्री परमिंदर सिंह, फैसिलिटी डायरेक्टर, यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-88, फरीदाबाद, ने कहा, “ऐसे मामलों में सही समय पर इलाज शुरू होना और सभी विभागों का मिलकर काम करना सबसे ज़्यादा मायने रखता है। इस मरीज के इलाज में सर्जन, एनेस्थीसिया टीम, न्यूरोक्रिटिकल केयर विशेषज्ञों और नर्सिंग स्टाफ ने शुरुआत से लेकर रिकवरी तक पूरी टीम के रूप में काम किया। इसी तालमेल की बदौलत मरीज जल्द स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन में लौट सकीं। हमारी कोशिश रहती है कि हर मरीज को समय पर सही इलाज और बेहतर देखभाल मिल सके।”
