यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-88 फरीदाबाद में हुई क्षेत्र की पहली अनोखी द्विपक्षीय कॉक्लियर इम्प्लांट सफल सर्जरी
फरीदाबाद: ईएनटी तथा हियरिंग रिस्टोरेशन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-88 फरीदाबाद के चिकित्सकों ने उन्नत वेरिया (Veria) तकनीक का उपयोग कर पोस्ट-लिंगुअल बधिरता से पीड़ित एक वयस्क मरीज की क्षेत्र की पहली द्विपक्षीय (दोनों कानों में) कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी सफलतापूर्वक संपन्न की है।
यह अत्यंत जटिल सर्जरी मात्र तीन घंटे में पूरी की गई, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है क्योंकि यह समय कई पारंपरिक एकतरफा मास्टॉयडेक्टॉमी सर्जरी से भी कम है। इस सफल ऑपरेशन को डॉ. (प्रो.) आनंद गुप्ता, रीजनल डायरेक्टर एवं एचओडी ईएनटी एवं हेड एंड नेक कैंसर ने अंजाम दिया, जिससे न्यूनतम चीरा आधारित कॉक्लियर इम्प्लांट प्रक्रियाओं में एक नया मानक स्थापित हुआ है।
पोस्ट-लिंगुअल बधिरता ऐसी स्थिति होती है, जिसमें व्यक्ति बोलने और भाषा विकसित करने के बाद अपनी सुनने की क्षमता खो देता है। इससे संचार में गंभीर बाधाएं, मानसिक तनाव और जीवन की गुणवत्ता में कमी आ सकती है। दोनों कानों में कॉक्लियर इम्प्लांट लगाने से ध्वनि को बेहतर तरीके से समझने, शोरगुल वाले वातावरण में बातचीत पहचानने, आवाज की दिशा का सटीक पता लगाने और समग्र रूप से बेहतर श्रवण क्षमता प्राप्त करने में मदद मिलती है।
इस उपलब्धि पर डॉ. (प्रो.) आनंद गुप्ता ने कहा, “यह सर्जरी कॉक्लियर इम्प्लांट तकनीक के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वेरिया तकनीक के माध्यम से पोस्ट-लिंगुअल बधिर वयस्क मरीज में दोनों कानों का कॉक्लियर इम्प्लांट मात्र तीन घंटे में पूरा करना हमारी सर्जिकल दक्षता और तकनीकी प्रगति को दर्शाता है। यह तकनीक ऑपरेशन से होने वाले आघात को कम कर सकती है, रिकवरी अवधि को छोटा बना सकती है और गंभीर श्रवण हानि वाले मरीजों के लिए बेहतर दीर्घकालिक परिणाम प्रदान कर सकती है।”
वेरिया तकनीक कॉक्लियर इम्प्लांटेशन की एक उन्नत न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें पारंपरिक सर्जरी की तरह पोस्टीरियर टिम्पैनोटॉमी के बजाय कान की नली (ईयर कैनाल) के माध्यम से ट्रांसकैनल मार्ग का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक में इलेक्ट्रोड डालने के लिए कान की पिछली दीवार के माध्यम से एक सीधा मार्ग बनाया जाता है, जिससे ऊतकों को कम नुकसान पहुंचाते हुए प्रक्रिया अधिक तेज और सुरक्षित बनती है। साथ ही, यह पारंपरिक सर्जरी से जुड़े चेहरे की नस (फेशियल नर्व) को क्षति पहुंचने जैसे जोखिमों को भी कम करने में मदद करती है।
श्री परमिंदर सिंह, फैसिलिटी डायरेक्टर, यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-88 फरीदाबाद ने कहा, “इस तरह की पहली द्विपक्षीय कॉक्लियर इम्प्लांट सर्जरी की सफलता यह दर्शाती है कि न्यूनतम इनवेसिव नवाचार श्रवण संबंधी सर्जरी के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रहे हैं। वेरिया तकनीक अधिक सटीकता, दक्षता और सुरक्षा प्रदान करती है, जो जटिल द्विपक्षीय प्रक्रियाओं में बेहद महत्वपूर्ण हैं। पोस्ट-लिंगुअल बधिरता से जूझ रहे वयस्कों के लिए समय पर सुनने की क्षमता बहाल होना उनके संवाद, सामाजिक भागीदारी और जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार ला सकता है।”
यह सफलता यथार्थ हॉस्पिटल, सेक्टर-88 फरीदाबाद की अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाओं के माध्यम से विशेष चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस उपलब्धि के साथ अस्पताल ने श्रवण पुनर्स्थापन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और यह साबित किया है कि नवीन एवं न्यूनतम इनवेसिव तकनीकें गंभीर श्रवण हानि वाले मरीजों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।
