सरकारी अस्पताल के गेट पर डिलीवरी मामले में कार्रवाई, स्टाफ नर्स और कर्मचारी निलंबित

फरीदाबाद। सेक्टर-3 के प्रजनन एवं स्वास्थ्य शिशु केंद्र (एफआरयू दो) के गेट पर डिलीवरी मामले में स्टाफ नर्स राखी और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी सुखबीर को निलंबित कर दिया गया है। यह दोनों राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत अस्पताल में कार्यरत थे। स्वास्थ्य निदेशक (मदर एंड चाइल्ड) डॉ. वीरेंद्र यादव की जांच में लापरवाही पाए जाने पर निलंबन के आदेश जारी किए गए हैं। अस्पताल केे गेट पर 15-16 मई की रात करीब डेढ़ बजे डिलीवरी से स्वास्थ्य विभाग में हडक़ंप मच गया। मामले पर प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री आरती सिंह राव ने संज्ञान लिया और निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव को मौके पर जांच के लिए भेजा।

उन्होंने गर्भवती के स्वजन और अन्य स्टाफ से भी पूछताछ की। साथ ही स्वजन द्वारा रिकॉर्ड किए गए वीडियो को भी देखा। अस्पताल का गेट बंद होने को उन्होंने बड़ी लापरवाही बताई है। उन्होंने सीएमओ डॉ. जयंत आहूजा और डिप्टी सीएमओ डॉ. रचना की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया। शुरूआती जांच में स्टाफ नर्स राखी और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी सुखबीर की लापरवाही सामने आई है, दोनों को निलंबित कर दिया गया है। गर्भवती महिला बलेश को लेकर देवर चमन चंदीला रात के करीब 1.30 बजे एफआरयू दो पहुंचे थे। लेकिन यहां ओपीडी का दरवाजा बंद था। इमरजेंसी में भी कोई नहीं स्टाफ नहीं मिला। गर्भवती की प्रसव पीड़ा बढ़ रही थी। करीब 20 मिनट तक अस्पताल की ओर से कोई मदद नहीं मिली।

इसी बीच बच्चे का जन्म हो गया। जच्चा और बच्चा को सास ने संभाला। महिला से स्वजन द्वारा स्टाफ नहीं होने का कारण पूछने पर चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी सुखबीर और नर्स राखी ने दुव्र्यवहार किया था। हालांकि बच्चे के जन्म के करीब 20 मिनट बाद मौके पर दो नर्स पहुंची थी और जच्चा बच्चा को अस्पताल में भर्ती कराया था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. जयंत आहूजा ने बताया कि मामले की जांच में स्टाफ नर्स राखी और चुतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी सुखबीर की लापरवाही सामने आई है। दोनों को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही अन्य डाक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को आदेश दिए गए हैं कि मरीजों को बिना किसी विलंब के उपचार उपलब्ध कराया जाए। अस्पताल के प्रवेश द्वार को भी खोलकर रखने के आदेश दिए गए हैं।

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