सैलरी बढ़ाने को लेकर वर्करों ने किया प्रदर्शन

फरीदाबाद। सेक्टर-6 स्थित एक दवा फैक्ट्री में काम करने वाले कामगारों ने राज्य सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन न दिए जाने के विरोध में शुक्रवार को काम-काज बंद कर दिया। काम करने वाले पुरुष एवं महिला कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ने न्यूनतम वेतन 15 हजार 200 रुपये प्रति महीना घोषित किया है। फैक्ट्री प्रबंधन ने उनके वेतन में मात्र 200 रुपये बढ़ाए हैं। कामगारों का कहना था कि उनके बैंक खाते में फिलहाल 13 हजार 200 रुपये वेतन आया है। 13 हजार रुपये उन्हें पहले से ही मिल रहा है। अब प्रबंधन को 15 हजार 200 रुपये वेतन देना चाहिए। जो नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यदि कोई कामगार किसी दिन ड्यूटी आधा घंटे देरी से आता है, उस समय को ड्यूटी टाइम में समायोजित करने के लिए आधा घंटा देरी से छुट्टी पर छोड़ते हैं। कई बार एक घंटा अतिरिक्त रूप से रोक लेते हैं, उसका कोई ओवरटाइम नहीं देता। इसलिए अब प्रबंधन को बढ़ा हुआ वेतन देना पड़ेगा।

महिला वर्कर लता ने बताया कि वर्करों के अनुसार वे ठेकेदार के माध्यम से काम करते हैं और जब भी वेतन बढ़ाने की बात करते हैं, तो ठेकेदार कंपनी का हवाला देकर मना कर देता है। वर्करों ने बताया कि कई बार उन्हें सैलरी बढ़ाने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन हर बार महीने के अंत तक कोई बढ़ोतरी नहीं होती और उन्हें पुराने वेतन पर ही काम करना पड़ता है। कर्मचारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई में इतनी कम सैलरी में परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो गया है। ओवरटाइम के बाद भी उनकी आय 14 से 15 हजार रुपए तक ही पहुंच पाती है। जिससे बच्चों की पढ़ाई, किराया और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना चुनौती बन गया है। इसी के चलते वर्करों ने एकजुट होकर कंपनी के बाहर प्रदर्शन किया और वेतन बढ़ाने की मांग की है। फैक्ट्री प्रबंधन का कहना है कि इस मामले में अभी बैठक चल रही है। जो भी फैसला होगा, उसके अनुसार वेतन दिया जाएगा।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.