मुजेड़ी ग्राम पंचायत में 22 करोड़ का गबन, एसीबी ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट

फरीदाबाद। ग्राम पंचायत मुजेड़ी में विकास कार्य किए बिना 22 करोड़ रुपये हड़पने के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के डीएसपी ने जांच टीम से स्टेट्स रिपोर्ट मांगी है। दरअसल, शिकायतकर्ता पक्ष जांच में ढिलाई का आरोप लगाते हुए दो दिन पहले डीएसपी से मिले थे। अब डीएसपी को दी रिपोर्ट में बताया है कि मामले में फरार आरोपितों की धरपकड़ के लिए मुजेड़ी गांव के अलावा अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। डीएसपी को सौंपी रिपोर्ट में कहा गया है कि मुजेड़ी की तत्कालीन खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) पूजा शर्मा, उसका सगा भाई ललित मोहना शर्मा और भाभी तनुजा, ठेकेदार हीरालाल, नंदकिशोर और मनोज गिरफ्तार किए जा चुके हैं। पूजा-तनुजा हाइकोर्ट से जमानत पर हैं।

नीमका जेल में बंद ठेकेदार मनोज ने जिला अदालत में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम कुमार के समक्ष जमानत याचिका दायर की थी, जिसे शुक्रवार को खारिज हो गई है। एसीबी ओर से याचिका खारिज किए जाने के लिए अदालत में ठोस दलीलें दी गई थी। अभी तक की जांच में गबन करने वालों के 16 नाम सामने आए हैं। जैसे-जैसे गिरफ्तारियां होंगी, वैसे-वैसे नाम बढऩे की संभावना है। केस का मुख्य सूत्रधार ग्राम पंचायत का तत्कालीन कार्यवाहक सरपंच बिरमपाल बताया जा रहा है, जो फरार है। उसकी गिरफ्तारी से कई नाम उजागर होंगे।

एसीबी का मानना है कि बिरमपाल ने सरकारी खाते से जो रकम निकाली थी, वह उसने कई साजिशकर्ताओं को दी थी। इसीलिए वह अहम कड़ी है और उसकी गिरफ्तारी के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विवित हो कि वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर के आदेश पर मुजेड़ी ग्राम पंचायत में 22 करोड़ गबन किए जाने की एफआइआर दर्ज की गई थी। तत्कालीन पंच सतबीर कपासिया ने मुख्यमंत्री को शिकायत दी थी। शिकायत में बताया था कि कुछ साजिशकर्ताओं ने पहले तो महिला सरंपच रानी को झूठे केस में फंसाकर निलंबित कराया था।

सुनियोजित तरीके से पंच बिरमपाल को कार्यवाहक सरंपच बनवाया गया। उस वक्त गांव में कुल 13 पंच थे। इसके बाद वर्ष 2020 में तत्कालीन बीडीपीओ, ग्राम सचिव और कार्यवाहक सरपंच ने पंचायत के खाते से 22 करोड़ रुपये निकालकर अलग अलग ठेकेदार फर्मों के खाते में ट्रांसफर कर दिए थे। बीडीपीओ ने काफी रकम अपने सगे भाई ललित मोहन, भाभी तनुजा की फर्म को भी ट्रांसफर कराई। ये बातें जब पंचों को पता चली तो 12 पंचों ने हस्ताक्षर करके तत्कालीन सीएम से शिकायत की थी। एसीबी की जांच में सभी 12 पंचों ने अपने बयान अंकित कराए हैं। जिनमें उन्होंने कहा है कि 22 करोड़ की जो अदायगी विभिन्न फर्मों को की गई है, उन्होंने गांव में किसी भी प्रकार का कोई विकास कार्य नहीं किया है। जांच में उपरोक्त आरोप साबित हो चुके हैं।

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