आत्मनिर्भर क्राफ्ट फेस्टिवल के नाम से होगा 39वां अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेला

1300 स्टॉल बनाई, लाखों लोगों के पहुंचने की उम्मीद

फरीदाबाद।  फरीदाबाद जिले के सूरजकुंड में लगने वाला 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेला इस बार आत्मनिर्भर भारत की सोच को समर्पित रहेगा। इसी कारण मेले को इस वर्ष सूरजकुंड इंटरनेशनल आत्मनिर्भर क्राफ्ट फेस्टिवल के नाम से आयोजित किया जा रहा है। 42.5 एकड़ में फैले मेला परिसर में 1300 स्टॉल बनाई गई है। वर्ष 2025 के लगे 38वें मेले में 44 से अधिक देशों के 635 प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा 15 लाख से अधिक पर्यटकों ने मेले का भ्रमण किया था। सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प मेले का आयोजन 31 जनवरी से 15 फरवरी तक किया जाएगा। मेले को लेकर पर्यटन विभाग लगातार तैयारी कर रही है। मेला की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। वर्ष 2013 में सूरजकुंड क्राफ्ट मेला को राष्ट्रीय स्तर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्नत किया गया और इसका नाम सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय मेला रखा गया। वर्ष 2026 के 39वें संस्करण में मेले का नाम बदलकर सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर क्राफ्ट फेस्टिवल किया गया है। वर्ष 2025 में 1188 शिल्पकारों ने भाग लिया था।

फरीदाबाद डीसी आयुष सिन्हा ने बताया कि इस बार मेले का उद्घाटन उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन मुख्य अतिथि के द्वारा किया जाएगा। इस वर्ष मेघालय और उत्तर प्रदेश को थीम स्टेट का दर्जा दिया गया है, जबकि मिस्र को तीसरी बार पार्टनर कंट्री चुना गया है। मेले में देश-विदेश के शिल्पकारों द्वारा तैयार किए गए हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों की प्रदर्शनी व बिक्री की जाएगी। साथ ही पार्टनर कंट्री और थीम स्टेट के विशेष फूड स्टॉल आकर्षण का केंद्र रहेंगे। हर दिन सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोक नृत्य और संगीत प्रस्तुतियां होंगी। बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं, झूले और मनोरंजन क्षेत्र भी तैयार किए गए हैं। वर्ष 2025 के लगे 38वें मेले में 44 से अधिक देशों के 635 प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा 15 लाख से अधिक पर्यटकों ने मेले का भ्रमण किया था।

वर्ष 2025 के लगे 38वें मेले में 44 से अधिक देशों के 635 प्रतिभागियों ने भाग लिया तथा 15 लाख से अधिक पर्यटकों ने मेले का भ्रमण किया था। मेला प्रशासक एवं एडीसी सतबीर मान ने बताया कि सूरजकुंड मेला भारतीय लोक कला और पारंपरिक शिल्प को वैश्विक मंच देने का एक सशक्त माध्यम है। उत्कृष्ट कारीगरों को कला रत्न, कला मणि, कला निधि, परमपरागत और कला श्री जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जाएगा। इस मेले की शुरुआत वर्ष 1987 में तत्कालीन सचिव पर्यटन, भारत सरकार एस.के. मिश्रा एवं तत्कालीन सचिव पर्यटन, हरियाणा एस.के. शर्मा के प्रयासों से हुई थी। इसका उद्देश्य लुप्तप्राय भारतीय कला एवं शिल्प को संरक्षण प्रदान करना था। वर्षों के दौरान यह मेला शिल्पकारों को बिचौलियों के बिना सीधे खरीदारों से जोडऩे का सशक्त मंच बन चुका है।

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