Faridabad : कार्यक्रम का शुभआरंभ संगीत कला केंद्र के मैनेजर श्री एस एन गोगिया एवं प्राचार्य दीपेन्द्र कांत ने किया । सर्व प्रथम सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र के बच्चों को निज मानव स्वरूप की पहचान पर आधारित एक वीडियो के माध्यम से आत्म उत्थान की जानकारी दी गई तथा इस ज्ञान पर आधारित पुस्तकें भी वितरित की गई। इसके पश्चात बच्चों ने राग गायन व कथक नृत्य की विशेष प्रस्तुति द्वारा सबको मंत्र मुग्ध किया। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने भजन, गीत,गज़ल आदि गाकर अपनी प्रस्तुतियों एवं श्रीराम स्तुति की सामुहिक प्रस्तुति से सभी का मन मोह लिया। इस कार्यक्रम में भाग लेने वाले बच्चों को सर्टिफिकेट देकर उनका उत्साह बढ़ाया गया तथा उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहन दिया गया।
सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र के मैनेजर एस एन गोगिया जी ने सबको आशीर्वाद दिया। जैसा कि सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र दिल्ली, फरीदाबाद, पानीपत, अबाला, जालंधर, लुधियाना, रोहतक जैसे विभिन्न शहरों में फैले हुए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि कला केंद्र प्रयाग संगीत समिति, प्रयागराज से संबद्ध है जो हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की शिक्षा दे रहा है।
उन्होंने सभी को संदेश दिया कि संगीत और नृत्य की सामुहिक प्रस्तुति से बच्चों के अंदर एकता, आध्यात्मिक ज्ञान व प्रेम की भावना जाग्रत होती है। संगीत एक प्रभावशाली माध्यम है, इसकी गुणवत्ता का समाज के उत्थान या पतन पर असर पड़ता है। सच्चे संगीतकारों को मानवता के पतन के प्रति मूकदर्शक नहीं बने रहना चाहिए। उन्हें अपनी प्रतिभा और कौशल को समय-परीक्षित मानवीय मूल्यों और नैतिकता को पुनर्जीवित करने के लिए समर्पित करना चाहिए।
इस अवसर पर सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र के प्रधानाचार्य दीपेंद्र कांत ने बताया कि संगीत केवल सौंदर्य या मानसिक उत्कृष्टता के प्रदर्शन के लिए ही नहीं, बल्कि “आत्मा” का ज्ञान सीधे एकाग्रचित्त मन तक पहुचाने हेतु है। संगीत का जीवन महत्व पर चर्चा करते हुए बताया कि वेदों मे भी ‘सामवेद’पूर्णतः संगीतमय है। सभी के लिए संगीत ‘जीवन-अमृत’ सदृश है। कार्यक्रम में सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्र के मैनेजर श्री एस. एन. गोगिया जी ने मुख्य अतिथि बनकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई । कार्यक्रम में मंच संचालन केशव शुक्ला ने तथा बच्चों का मार्ग दर्शन संजय बिडलान तथा दिशा हर्ष ने किया।
