
1965 में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी को अमेरिका के राष्ट्रपति लिंडन जॉनसन ने अमरीका आने का एक आधिकारिक निमंत्रण भेजा था। शास्त्री जी विदेश यात्रा पर थे, वहीं से अमेरिका जाने की योजना थी, पर रास्ते में ही अचानक सूचना आई कि अमेरिका ने उनका निमंत्रण रद्द कर दिया है। यह केवल निमंत्रण वापसी नहीं थी, यह कूटनीतिक दुराचार था, संप्रभु भारत का कूटनीतिक अपमान था। एक स्वतंत्र, लोकतांत्रिक राष्ट्र के निर्वाचित नेता के साथ यह घोर निरादर था। भारत को दुनिया के सामने लज्जित किया गया था। बाद में उजागर हुआ कि यह निर्णय पाकिस्तान के तानाशाह अयूब ख़ान के दबाव में हुआ। वह क्षण भारत के आत्मसम्मान पर गहरा आघात था। भारत को अपमान का घूँट पीकर रह जाना पड़ा। उस समय भारत का सामरिक बल कम था और वैश्विक मंच पर आवाज़ बहुत धीमी थी। अतः भारत ने उस अपमान को माफ़ किए बिना इतिहास के कड़वे पन्नों में दर्ज कर लिया।
लेकिन आज कहानी बदल चुकी है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने न सिर्फ़ अपने स्वाभिमान को पुनः परिभाषित किया, बल्कि वैश्विक शक्ति की भूमिका में खुद को मजबूती से स्थापित कर दिया। मोदी युग का भारत अब सिर झुकाता नहीं, आँखों में आँखें डालकर जवाब देता है। आज विश्व भारत की शक्ति को स्वीकार करने को मजबूर है।
पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के ज़रिए भारत ने पाकिस्तान को आतंक की कीमत युद्ध से चुकाने का इरादा जताया और पाकिस्तान को उसके घर पर ठोका।
आश्चर्यजनक था कि इसके बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत-विरोधी अनर्गल बयानबाज़ी करते हुए, एक महीने तक झूठा दावा करते रहे कि उन्होंने भारत-पाक में सीज़फायर करवा दिया!
वही ट्रम्प, कनाडा में जी-7 सम्मेलन में गए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर संपर्क साध कर कहते हैं– “चूँकि आप पास ही हैं, अमेरिका भी आ जाइए। हम डिनर पर मिलते हैं और कुछ ज़रूरी बातें करते हैं।”
लेकिन यह 1965 वाला भारत नहीं था। मोदी ने दृढ़ शब्दों में कहा- “मेरे कार्यक्रम पहले से तय हैं। मेरे पास समय नहीं है। आप कभी भारत आइए।” यह जवाब उस भारत का था जो न तो किसी दबाव में आता है, न किसी को अपनी गरिमा के विरुद्ध बोलने देता है।
मोदी ने 35 मिनट की उसी बातचीत में ट्रम्प को दो टूक शब्दों में यह भी स्पष्ट कर दिया कि भारत ने कभी किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की और भविष्य में भी नहीं करेगा। मोदी ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ है और यदि पाकिस्तान की धरती से एक भी आतंकी हमला होता है तो भारत उसे युद्ध का सीधा निमंत्रण मानेगा। भारत अब न परमाणु ब्लैकमेलिंग से डरता है और न ही आतंकवादी और पाकिस्तान राज्य में भेद करता है।
यह वही भारत है, जो एक समय अमेरिका के झूठे अहंकार के नीचे अपमानित हुआ था, लेकिन अब उसी अमेरिका को आत्मसम्मान का पाठ पढ़ा रहा है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने यह सिद्ध कर दिया है कि आत्मगौरव के साथ, निर्णायक सोच, स्पष्ट नीति और राष्ट्रहित सर्वोपरि हो तो अपमान को भी इतिहास की प्रेरणा में बदला जा सकता है। अब भारत किसी वैश्विक ताक़त के दबाव में नहीं आता, अब भारत ख़ुद एक वैश्विक ताक़त है।
[लेखक भाजपा प्रवक्ता हैं]
