छोटी बहन ने लिवर का टुकड़ा दान कर बड़े भाई को नया जीवन दिया

फरीदाबाद। महिलाएं केवल जननी ही नहीं है, जरूरत पडऩे पर अपने भाई, पिता, पति और बच्चों के प्राण बचाने के लिए अंग दान कर ‘जीवनदाता’ की भूमिका भी निभा रही हैं। हाल ही में फरीदाबाद के सेक्टर-16 स्थित एक निजी अस्पताल में एक ऐसा मामला आया, जहां एक छोटी बहन ने अपने लिवर का हिस्सा दान कर बड़े भाई की जान बचाई। डॉ. पुनीत सिंगला ने बताया कि हमारे पास श्रीनगर से 52 वर्षीय राजेश कुमार लिवर से जुड़ी कुछ समस्याओं के साथ आया। जाँच करने पर पता चला कि मरीज को लिवर सिरोसिस की गंभीर बीमारी थी और मरीज में लिवर फेलियर के लक्षण में शुरू हो चुके थे इसलिए मरीज को जल्द ही लिवर ट्रांसप्लांट कराने की जरूरत थी। जाँच में यह भी पता चला कि मरीज के हार्ट में माइट्रल वाल्व रिगर्जिटेशन (पूरी तरह बंद न होने के कारण वाल्व से खून का रिसाव होना) नाम की गंभीर बीमारी भी थी। इसलिए लिवर ट्रांसप्लांट करने से पहले मरीज के हार्ट के वाल्व का ऑपरेशन करने का फैसला लिया गया।

हॉस्पिटल की अनुभवी कार्डियक थोरेसिक सर्जरी टीम द्वारा दिसंबर के महीने में मरीज के हार्ट का वाल्व रिप्लेसमेंट किया गया और ऑपरेशन सफल रहा। लिवर ट्रांसप्लांट जैसे प्रोसीजर के लिए मरीज कुछ ही दिनों में फिट हो गया। बड़े भाई के प्राण संकट में देख मरीज की शादीशुदा छोटी बहन सुदेश कुमारी (44 वर्षीय) अपने ससुराल पक्ष की सहमति से अपने भाई को अपना लिवर देने के लिए आगे आई। जाँच में पता चला कि मरीज की बहन लिवर डोनेट करने के लिए मेडिकल रूप से फिट थी।

सारी लीगल और मेडिकल फॉर्मेलिटीज पूरी करने के बाद मार्च महीने में लिवर ट्रांसप्लांट प्रोसीजर किया गया। ट्रांसप्लांट के दौरान डोनर ने अपने लिवर के दाहिने तरफ का हिस्सा अपने भाई राजेश कुमार को डोनेट किया। लिवर ट्रांसप्लांट सफल रहा। ट्रांसप्लांट के बाद से मरीज और डोनर दोनों पूरी तरह से स्वस्थ हैं। मरीज की लिवर सिरोसिस की समस्या भी खत्म हो गई है। नया जीवन देने के लिए राजेश कुमार ने अपनी बहन और जीजा का शुक्रिया किया।

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