जीवा पब्लिक स्कूल के दशहरा समारोह में ‘हनुमान अंश’ की प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर व गायक सुनील लोधी की उपस्थिति
फरीदाबाद : सेक्टर 21बी स्थित जीवा पब्लिक स्कूल में दशहरा समारोह उत्साह और सांस्कृतिक उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर फिल्म ‘हनुमान अंश’ की प्रोड्यूसर सुश्री अनुप्रिया नागर अपनी टीम के साथ शामिल हुईं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ आयोजित रावण दहन कार्यक्रम में भाग लिया। फिल्म के गायक श्री सुनील लोधी आज के सम्मान समारोह में उपस्थित रहे, जो दृष्टिबाधित भजन एवं लोक गायक हैं और बुंदेली भाषा में गायन के लिए प्रसिद्ध हैं। सुश्री अनुप्रिया नागर ने अपनी टीम के साथ जीवाग्राम का दौरा किया और जीवा पब्लिक स्कूल का अवलोकन कर उसकी विशिष्ट शिक्षण पद्धति के बारे में जानकारी प्राप्त की। गायक श्री सुनील लोधी जी ने अपनी मधुर आवाज़ में सभी को भक्तिमय भजन सुनाकर मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके भजनों ने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया और बच्चों को भारतीय संस्कृति, भक्ति एवं आध्यात्मिकता से जुड़ने का सुंदर संदेश दिया।
आज के समारोह का शुभारंभ पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। इस अवसर पर विद्यालय के अध्यक्ष श्री ऋषिपाल चौहान, उपाध्यक्षा श्रीमती चंद्रलता चौहान, एकेडमिक हेड श्रीमती मुक्ता सचदेव एवं प्रधानाचार्या डॉ नरजीत कौर एवं सभी अतिथि उपस्थित रहे, तदुपरांत बच्चों द्वारा प्रस्तुत हनुमान चालीसा के पाठ ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। यह आयोजन छात्रों को भारतीय संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रेरणादायक अवसर बना। इस अवसर पर फरीदाबाद के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे जिनमें एफ०एल०सी०सी० के सांस्कृतिक सचिव विनोद मलिक, कोषाध्यक्ष वासु सत्यार्थी उपस्थित रहे।
फरीदाबाद रोटरी आस्था क्लब के अध्यक्ष उमंग मलिक, रोटेरियन राज भाटिया, रोटेरियन गौतम मल्होत्रा, रोटेरियन मधुसूदन चौहान उपस्थित रहे।
इस अवसर पर गायक सुनील लोधी को फरीदाबाद के रोटरी क्लब, एफ०एल०सी०सी० एवं जीवा संस्थान की ओर से सम्मानित किया गया।
सुश्री अनुप्रिया नागर ने अपनी यात्रा में आयुर्वेद एवं योग पर आधारित समग्र वेलनेस की अवधारणा को करीब से अनुभव किया। जीवाग्राम के शांत और प्राकृतिक वातावरण आयुर्वेद एवं योग के माध्यम से उन्होंने मानसिक शांति और आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया।
उन्होंने पारंपरिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धतियों का अनुभव किया तथा योग थेरेपी में भाग लेकर शारीरिक संतुलन, सहजता और आंतरिक सामंजस्य के महत्त्व को जाना। ध्यान साधना के माध्यम से उन्होंने मानसिक शांति और आत्मचिंतन के महत्त्व को अनुभव किया। इसके साथ ही, उन्होंने त्राटक ध्यान का भी अनुभव किया।
इस यात्रा का एक विशेष आकर्षण ग्रामीण रसोई का अनुभव भी रहा। यहाँ सुश्री नागर ने पारंपरिक ग्रामीण जीवन की सादगी, आत्मीयता और सांस्कृतिक समृद्धि को करीब से अनुभव किया। आयुर्वेद, योग, ध्यान और ग्रामीण जीवन के इन विविध अनुभवों ने उनकी यात्रा को एक विशिष्ट स्वरूप प्रदान किया।
जीवाग्राम में अपने अनुभव साझा करते हुए सुश्री अनुप्रिया नागर ने कहा, “जीवाग्राम में आयुर्वेद का अनुभव करने के बाद मैं तनावमुक्त और नई ऊर्जा से भरपूर महसूस कर रही हूँ।”
इस अवसर पर अध्यक्ष श्री ऋषिपाल चौहान ने कहा कि भारत भावों और संवेदनाओं का देश है, जहाँ संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों का विशेष महत्व है। उन्होंने इस अवसर को भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत, आयुर्वेद की प्राचीन ज्ञान परंपरा और आधुनिक जीवनशैली के बीच सामंजस्य स्थापित करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास बताया।
मधुसूदन चौहान ने जीवा स्कूल की प्रकृति एवं कार्यशैली पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यदि बच्चे अपनी बुद्धि, स्वभाव और प्राकृतिक क्षमताओं को पहचानकर उनके अनुरूप कार्य करें, तो वे जीवन में सफलता की नई ऊँचाइयों तक पहुँच सकते हैं।
