एलएडीसी योजना से युवा वकीलों का भविष्य खतरे में, सरकार तत्काल वापस ले : एडवोकेट मोहन तिवारी

- एलएडीसी के खिलाफ फरीदाबाद बार का आंदोलन सराहनीय, वकीलों के हितों से समझौता स्वीकार नहीं : एडवोकेट डॉ. मोहन तिवारी

फरीदाबाद । सेक्टर-12 निवासी एडवोकेट एवं समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने विधिक सहायता रक्षा अधिवक्ता (एलएडीसी) योजना का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह योजना स्वतंत्र वकालत की परंपरा और हजारों युवा अधिवक्ताओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने केंद्र सरकार से अधिवक्ता समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए एलएडीसी योजना को तत्काल वापस लेने की मांग की।

एडवोकेट समाजसेवी डॉ. मोहन तिवारी ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में विधिक सहायता के मामलों के माध्यम से बड़ी संख्या में नए और स्वतंत्र अधिवक्ताओं को न्यायालयीन कार्य का अनुभव प्राप्त होता है। यदि अधिकांश मामले सीमित संख्या में नियुक्त एलएडीसी अधिवक्ताओं को दिए जाएंगे, तो अनेक युवा अधिवक्ताओं के लिए व्यावसायिक अवसर कम हो सकते हैं और उनके अनुभव प्राप्त करने के अवसर भी प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को प्रभावी कानूनी सहायता मिलनी चाहिए, लेकिन ऐसी व्यवस्था भी होनी चाहिए जिसमें अधिवक्ताओं के व्यापक वर्ग को समान अवसर मिलें और स्वतंत्र वकालत की गरिमा बनी रहे।

एडवोकेट डॉ. मोहन तिवारी ने जिला बार एसोसिएशन, फरीदाबाद के अध्यक्ष राजेश बैसला तथा महासचिव टीका डागर के नेतृत्व में एलएडीसी योजना के विरोध में चलाए जा रहे आंदोलन और हड़ताल की सराहना करते हुए कहा कि अधिवक्ताओं के हितों और स्वतंत्र वकालत की रक्षा के लिए फरीदाबाद बार द्वारा उठाई गई यह आवाज़ सराहनीय है। उन्होंने कहा कि बार एसोसिएशन का यह संघर्ष अधिवक्ता समाज की एकता और अधिकारों की रक्षा का प्रतीक है।

उन्होंने केंद्र सरकार, राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण तथा संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया कि अधिवक्ता समुदाय की आपत्तियों और सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाए तथा एलएडीसी योजना की समीक्षा कर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे न्याय के साथ-साथ अधिवक्ताओं के हित और रोजगार के अवसर भी सुरक्षित रह सकें। अंत में एडवोकेट डॉ. मोहन तिवारी ने कहा कि अधिवक्ताओं की न्यायोचित मांगों की अनदेखी उचित नहीं होगी। उन्होंने देशभर की बार एसोसिएशनों से अधिवक्ताओं के अधिकारों और स्वतंत्र वकालत की रक्षा के लिए एकजुट रहने का आह्वान किया।

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