एडवांस फेशियल और आइ रीकंस्ट्रक्शन सर्जरी से बचाई मरीज की आंख की रोशनी

इंडस्ट्रियल ग्राइंडर दुर्घटना में मरीज का चेहरा गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुआ  

फरीदाबाद। फोर्टिस एस्कॉट्र्स फरीदाबाद के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ मामले में सर्जिकल उत्कृष्टता का शानदार नमूना पेश करते हुए, चुरू (राजस्थान) के 53-वर्षीय मरीज की आंखों की रोशनी बचाने में कामयाबी हासिल की है। मरीज की आंखों की रोशनी बचाने के लिए जटिल फेशियल और आइ रीकंस्ट्रक्शन सर्जरी की गई। इस मामले में, मरीज एक औद्योगिक दुर्घटना के शिकार हुए थे जिसमें वुड ग्राइंडिंग मशीन उनके चेहरे पर गिरने से उनकी बायीं आंख की ऊपरी और निचली पलकें बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई थीं। मरीज को तत्काल फोर्टिस एस्कॉट्र्स फरीदाबाद के इमरजेंसी विभाग में लाया गया क्योंकि उनकी पलक से गाल तक करीब सात सेंटीमीटर लंबा गहरा घाव हो गया था, जिससे प्रभावित हिस्से की त्वचा उधड़ गई थी और काफी खून बह रहा था तथा मांसपेशियां भी उभर आयी थीं। डॉक्टरों का कहना था कि उन्होंने भी आंख और चेहरे पर इससे पहले इतनी खतरनाक चोट नहीं देखी थी, और इस दुर्घटना के बाद मरीज की जान के साथ-साथ उनकी आंख की रोशनी बचाने के लिए काफी गंभीरतापूर्वक प्रयास किए गए।

इमेजिंग से पता चला कि उनकी बायीं आंख की बाहरी सतह (कॉर्निया) और फ्रंट वॉल फट गई थी, साथ ही, चोट लगने की वजह से उनकी आंख के आसपास सूजन और हवा भरने की वजह से उभार भी दिखायी दे रहा था। खुशकिस्मती से नजदीक ऑर्बिटल हड्डियों में कोई फ्रैक्चर नहीं था, हालांकि आसपास की आइ-मूवमेंट से जुड़ी मांसपिशियों में मामूली सूजन थी। आंख की चोट के अलावा, उनके अन्य जरूरी संकेतक और ब्लड टेस्ट के परिणाम नॉर्मल रेंज में थे। इस जटिल मामले का नेतृत्व डॉ मोहसिन खान, सीनियर कंसल्टेंट, जनरल सर्जरी, फोर्टिस एस्कॉट्र्स फरीदाबाद कर रहे थे और उनके साथ अस्पताल की मल्टीडिसीप्लीनरी टीम भी थी। जब मरीज को अस्पताल लाया गया तो उनकी ऊपरी पलक से लेकर गाल तक लगभग 7&2 से.मी. आकार का गहरा घाव था, जिससे काफी खून बह रहा था और चेहरे की मांसपेशियों को भी काफी नुकसान पहुंचा था। चेहरे के सीटी स्कैन से पता चला कि बाएं कॉर्निया और एंटीरियर यूवियो-स्क्लेरल परत फट गई थी, सॉफ्ट टिश्यू में सूजन थी और क्षतिग्रस्त आंख के आसपास ऑर्बिटल एंफाइसेमा भी था। लेकिन मरीज की ऑर्बिटल बोन में फ्रैक्चर नहीं था, हालांकि आसपास की मांसपेशियां हल्की सूजी हुई दिख रही थीं।

मरीज की आंखों की जांच के बाद, डॉ अरविंद कुमार, सीनियर कंसल्टेंट – ऑपथैल्मोलॉजी, फोर्टिस एस्कॉट्र्स फरीदाबाद ने मरीज की तत्काल सर्जरी करने की पुष्टि की। अस्पताल की मल्टीडिसीप्लीनरी टीम और जनरल सर्जरी ने मिलकर मरीज को सामान्य एनेस्थीसिया देकर उनके चेहरे और बायीं आंख की जटिल रीकंस्ट्रकशन सर्जरी को पूरा किया। इस प्रक्रिया में क्षतिग्रस्त टिश्यू की रिपेयर काफी बारीकी और सावधानीपूर्वक करने की आवश्यकता थी। आसपास की क्षतिग्रस्त मांसपेशियों और संरचनाओं को महीन टांकों से काफी सावधानीपूर्वक सिला गया (स्टिचिंग) जिससे उनकी आंख के फंक्शन और मोबिलिटी को वापस लाने में मदद मिली। त्वचा को कॉस्मेटिक सर्जिकल तकनीकों की मदद से बेहद सावधानी के साथ सिला गया ताकि चेहरे पर सर्जरी के बाद कम से कम निशान दिखायी दे और फेशियल एस्थेटिक्स को भी जहां तक संभव हो सुरक्षित रखा जा सके।

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