5 साल की मासूम को मिला नया जीवन, यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-20 फरीदाबाद ने बिना बड़े चीरे के किया हार्ट डिफेक्ट का सफल उपचार

फरीदाबाद: यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-20 में डॉक्टरों की मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम ने दिल में बड़े छेद (ओस्टियम सेकुंडम ASD) से जूझ रही 5 वर्षीय बच्ची का मिनिमली इनवेसिव कार्डियक सर्जरी (MICS) तकनीक से सफल उपचार किया। इस उन्नत और सटीक प्रक्रिया को पीडियाट्रिक व एडल्ट कार्डियक साइंसेज़ के विशेषज्ञ—डॉ. वीरेश महाजन, डॉ. वेद प्रकाश, डॉ. पाराग शर्मा और डॉ. जुनैद मकबूल भट, ने मिलकर अंजाम दिया, जिससे बच्ची को बिना बड़े चीरे के सुरक्षित और तेज़ रिकवरी का अवसर मिला।

13.3 किलोग्राम वजन वाली बच्ची की जाँच में 18mm x 22mm आकार के बड़े ASD और लेफ्ट-टू-राइट शंटिंग के कारण दाहिने एट्रियम और वेंट्रिकल के फैलाव की पुष्टि हुई। प्री-ऑप इको में ट्रेस ट्राइकस्पिड रिगर्जिटेशन, सामान्य वेंट्रिकुलर फंक्शन और नॉर्मल सिस्टमिक एवं पल्मोनरी वेनस ड्रेनेज भी दिखा, जिसके आधार पर समय पर सर्जिकल करेक्शन जरूरी था।

यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, सेक्टर-20 फरीदाबाद के सी.टी.वी.एस. विभाग के डायरेक्टर और एच.ओ.डी. डॉ. वेद प्रकाश ने बताया “डिफेक्ट बड़ा होने और बच्ची के लक्षणों के कारण यह केस हाई-रिस्क कैटेगरी में था। समय रहते सर्जरी न होती तो भविष्य में पल्मोनरी हाइपरटेंशन, एरिदमिया और हार्ट फंक्शन कम होने जैसी जटिलताएँ विकसित हो सकती थीं। परिवार की हाई-रिस्क कंसेंट लेकर MICS अप्रोच के साथ ASD क्लोज़र किया गया। इस तकनीक में चेस्ट के बाएँ हिस्से में छोटी चीरा लगाया जाता है, जबकि पारंपरिक सर्जरी में सामने बड़ा चीरा देना पड़ता है। इस विधि से दर्द कम होता है, रिकवरी तेज होती है और सौंदर्य की दृष्टि से भी बेहतर परिणाम मिलते हैं—विशेष रूप से छोटे बच्चों के लिए।”

सर्जरी के दौरान आवश्यक ब्लड प्रोडक्ट सपोर्ट दिया गया और बच्ची को पोस्ट-ऑप पीडियाट्रिक CTVS ICU में भर्ती किया गया। जल्द ही वेंटिलेटर से हटाकर नेसल प्रोंग्स पर ऑक्सीजन दी गई और फिर उसे पूरी तरह रूम एयर पर शिफ्ट कर दिया गया। पोस्ट-ऑप इमेजिंग में डिफेक्ट का पूरी तरह क्लोजर, कोई रेजिडुअल ASD नहीं, नो पेरिकार्डियल इफ्यूज़न, ट्रिवियल TR और सामान्य बाइवेंट्रिकुलर फंक्शन रिपोर्ट किया गया — जो कि उत्कृष्ट परिणाम है।

बच्ची में पोस्ट-ऑप बाइलेटरल बेसल एटलेक्टेसिस व ब्रोंकोरिया विकसित हुई, जिसे चेस्ट फिजियोथेरेपी, नेब्युलाइजेशन और पोस्टुरल ड्रेनेज से नियंत्रित किया गया। कार्डियक आउटपुट ऑप्टिमाइज करने के लिए अस्थाई इनोट्रोपिक सपोर्ट और फ्यूरोसेमाइड एवं स्पाइरोनोलैक्टोन जैसे डाययूरेटिक्स का नियंत्रित उपयोग किया गया।

स्थिर वाइटल्स, अच्छा फीडिंग पैटर्न और सामान्य ऑक्सीजन सेचुरेशन (97–100%) के साथ बच्ची को डिस्चार्ज कर दिया गया।
यथार्थ ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के पीडियाट्रिक कार्डियक साइंसेज विभाग के चेयरमैन डॉ. वीरेश महाजन ने कहा “छोटे बच्चों में बड़े ASD हमेशा चुनौतीपूर्ण होते हैं, विशेषकर जब हार्ट चैंबर्स में फैलाव और शंट फ्लो ज्यादा हो। इस बच्ची में डिफेक्ट के आकार और लक्षणों को देखते हुए जल्दी सर्जिकल क्लोज़र जरूरी था। मिनिमली इनवेसिव अप्रोच से दिल की मरम्मत कम ट्रॉमा, कम इंफेक्शन रिस्क और तेज रिकवरी के साथ संभव होती है। हमें खुशी है कि बच्ची ने बेहतरीन प्रतिक्रिया दी और पूरी तरह स्वस्थ हो गई है।”

यथार्थ ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के ग्रुप सीईओ श्री अमित सिंह ने कहा, “ऐसे सफल परिणाम हमारे एडवांस्ड, संवेदनशील और पेशेंट-सेंट्रिक हेल्थकेयर के प्रति मजबूत संकल्प को दर्शाते हैं। इतने छोटे बच्चे में कॉम्प्लेक्स हार्ट डिफेक्ट का मिनिमली इनवेसिव तकनीक से इलाज हमारी क्लिनिकल एक्सीलेंस और टीमवर्क का प्रमाण है। यथार्थ में हम लगातार अत्याधुनिक तकनीक और विशेषज्ञता में निवेश कर रहे हैं ताकि सबसे नाज़ुक मामलों को भी वर्ल्ड-क्लास केयर मिल सके। हमारी टीम ने इस बच्ची को नया जीवन दिया, यह हमारे लिए गर्व का क्षण है।”

बच्ची को पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी टीम के नियमित फॉलो-अप, इलेक्ट्रोलाइट मॉनिटरिंग और पीडियाट्रिशन द्वारा आगे भी मूल्यांकन की सलाह दी गई है। वह पूरी तरह सामान्य और स्वस्थ जीवन जीने की संभावना के साथ घर गई है।

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