‘आयुष्मान भारत’ योजना से महिलाओं को मिला बम्पर लाभ, जानिए कैसे बदली पूरी तस्वीर

भारत में नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा शुरू की गई ‘आयुष्मान भारत-पीएम जन आरोग्य योजना’ के तहत निर्धन यानी गरीब वर्ग के परिवारों को 5 लाख रुपए तक का कैशलेस इलाज उपलब्ध कराया जाता है। छह साल पहले वर्ष 2018 में केंद्र सरकार ने इस योजना की शुरुआत की थी, जो अब बेहद लोकप्रिय और जनोपयोगी साबित हो रही है। इसके तहत अभी तक 32 करोड़ लोगों को आयुष्मान भारत कार्ड जारी किए जा चुके हैं। निकट भविष्य में ये आंकड़े और बढ़ेंगे।

आंकड़े बताते हैं कि जनस्वास्थ्य क्षेत्र की इस महत्वाकांक्षी योजना के लॉन्च होने के बाद शुरुआती दो सालों में केवल 10 करोड़ आयुष्मान भारत कार्ड ही जारी हो पाए थे। लेकिन बाद में हुई कार्य समीक्षा के पश्चात जब इस काम में आशा कर्मियों को लगा दिया गया तो पिछले दो सालों के भीतर ही सरकार ने 20 करोड़ कार्ड जारी कर दिए।

बहरहाल, आयुष्मान भारत-पीएम जन आरोग्य योजना महिलाओं के लिए एक वरदान साबित हो रही है, जो एक नया रिकॉर्ड बन चुका है। वाकई इस योजना के लाभार्थियों में महिलाओं की संख्या बढ़कर 48 फीसदी हो गई है। मसलन, पिछले 6 सालों में आयुष्मान भारत के तहत अस्पताल में भर्ती होकर अपना इलाज करने वाले लोगों का आंकड़ा 6.5 करोड़ है, जिसमें से 3.2 करोड़ महिलाएं हैं। वहीं, इस योजना के तहत सरकार ने 6 सालों में इलाज पर कुल 81,979 करोड़ रुपए खर्च किए, जिनमें से महिला लाभार्थियों पर खर्च होने वाली रकम 39,349 करोड़ रुपए है।

जानकार बताते हैं कि आयुष्मान भारत को लागू करने वाली एजेंसी नेशनल हेल्थ अथॉरिटी से जुड़े अधिकारियों ने जो आंकड़े दिए हैं, उससे पता चलता है कि देश के 8 राज्य ऐसे हैं, जहां महिला लाभार्थियों की संख्या पुरुषों से भी ज्यादा रही है। इसमें 68 फीसदी महिला लाभार्थियों के साथ जहां पहले नंबर पर मेघालय है, वहीं 57 फीसदी महिला लाभार्थियों के साथ अरुणाचल प्रदेश दूसरे स्थान पर है। इसी तरह 56 फीसदी महिला लाभार्थियों के साथ छत्तीसगढ़ तीसरे स्थान पर कायम है। वहीं, मिजोरम में 54 फीसदी, नागालैंड में 53 फीसदी, झारखंड और त्रिपुरा में 51 फीसदी और जम्मू कश्मीर में 50 फीसदी महिला लाभार्थी इससे लाभान्वित हुई हैं। इसके अलावा, जिन मेडिकल सेवाओं का लाभ महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा लिया, उनमें कैंसर, आंखों की समस्या, ईएनटी समस्याएं और नवजात बच्चों की देखभाल का पैकेज शामिल है।

अमूमन, महिलाओं के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में आए इस तरह के बदलाव की एक खास वजह है। वह यह कि ‘आयुष्मान भारत-पीएम जन आरोग्य योजना’ से पहले, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना थी, उसके तहत गैर-मान्यता प्राप्त सेक्टर में काम कर रहे गरीबी रेखा से नीचे वाले परिवार को एक ही कार्ड जारी होता था, जो परिवार के पुरुष मुखिया के नाम पर जारी किया जाता था। हालांकि, जब इस बात को महसूस किया गया कि इस सिस्टम के चलते महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने के लिए पुरुषों पर निर्भर रहना पड़ता था। इसीलिए, आयुष्मान भारत-पीएम जन आरोग्य योजना में परिवार के हर सदस्य को अलग आयुष्मान भारत कार्ड दिया गया, ताकि परिवार की महिलाओं को इलाज के लिए किसी के ऊपर निर्भर ना रहना पड़े।

इस योजना का लाभ उठाने के लिए चार शर्तें निर्धारित हैं। पहली, आपकी सालाना इनकम 2.5 लाख रुपए से कम होनी चाहिए। दूसरी, परिवार में 16 साल से ऊपर का कोई भी अन्य कमाने वाला सदस्य ना हो। तीसरी, यदि आप एससी या एसटी कैटेगरी से हैं तो इस योजना के लिए अप्लाई कर सकते हैं। चौथी, यदि आपके पास अपना कोई स्थाई घर नहीं है, तब भी आप इस योजना का फायदा उठा सकते हैं।

इस तरह से यह योजना गरीबों के लिए तो फायदेमंद है ही, महिलाओं के लिए भी ज्यादा उपादेय साबित हो रही है। हालांकि 140 करोड़ से अधिक की आबादी वाले देश में महज 32 करोड़ कार्ड बनाया जाना कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। इसलिए इस कार्य में और अधिक तेजी लाई जाए, ताकि अधिकाधिक महिलाओं को इसका लाभ मिल सके।

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