विश्व समभाव दिवस पर भव्य आयोजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ ‘वैल्यू योर वर्च्युज़’ के विजेता सम्मानित
सतयुग दर्शन वसुंधरा में भव्य आयोजन, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दिया आत्मज्ञान एवं मानवता का संदेश
समाज के चारित्रिक उत्थान हेतु विश्व समभाव दिवस पर दिया गया भौतिक ज्ञान से अधिक आत्मिक ज्ञान प्राप्ति को प्राथमिकता देने का संदेश
फरीदाबाद; सतयुग दर्शन ट्रस्ट (रजि0) के तत्वावधान में विश्व समभाव दिवस का भव्य एवं प्रेरणादायी आयोजन सतयुग दर्शन वसुंधरा स्थित सभागार में किया गया। कार्यक्रम में विश्व स्तर पर सतयुगी संस्कृति अनुसार यथार्थता पूर्ण जीवनयापन करने के योग्य बनने हेतु भौतिक ज्ञान से अधिक आत्मिक ज्ञान प्राप्ति को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया। जानो ऐसा सुनिश्चित करने पर ही हर मानव दुर्जनता छोड़ पुनः सज्जनता का प्रतीक बन सकता है यानि समभाव नज़रों में कर व सजन वृत्ति अपनाकर सजन भाव नज़रों में कर सजन भाव प्रकृति में ला आजीवन ब्रह्म भाव पर स्थिर बना रह सकता है।
कार्यक्रम का शुभारम्भ सतयुग दर्शन ट्रस्ट के मार्गदर्शक परम श्रद्धेय श्री सजन जी,सतयुग दर्शन ट्रस्ट की मैनेजिंग ट्रस्टी श्रीमती रश्मा गांधी जी, श्रीमती अनुपमा तलवार जी,पद्मश्री डॉ संत राम देसवाल, पद्मश्री सुमित्रा गुहा जी एवं अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सतयुग दर्शन ट्रस्ट के मार्गदर्शक श्री सजन जी ने अपने वक्तव्य में बताया कि ब्रह्म व ब्रह्माण्ड के इस समरूप आदि, अनादि व परमादि सत्य को अपने जीवन में हर विध विवेकशीलता से स्वीकारो कि “मैं ब्रह्म हूँ” यानि मैं स्वयमेव ही परमात्मा हूँ। फिर जीवन की हर परिस्थिति में इस सर्वोच्च सत्य पर मानसिक रूप से समरूपता से स्थित रहने का पराक्रम दिखाओ। परिणामतः निष्काम/अकर्ता भाव से जीवन के समस्त वेद-विहित कर्मों का अपने वास्तविक धर्म अनुकूल निर्वहन करने में समर्थ बन यथार्थतापूर्ण जीवनयापन करते हुए निर्विकारिता के प्रतीक बनने में सक्षम हो जाओ। ऐ विध हर क्षण परमानंन्द अवस्था में समरसता से सधे रह सजन पुरुष कहलाओ और श्रेष्ठता के प्रतीक बन जाओ यानि ऐसा व्यक्ति जो अपने विचारों, वचनों और कर्मों में उत्तम हो।
विश्व समभाव दिवस के शुभ अवसर पर सामाजिक, सांस्कृतिक एवं विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशिष्ट अतिथियों, शिक्षाविदों, विद्यालयों के प्रधानाचार्यों, अध्यापकों, विद्यार्थियों तथा सतयुग दर्शन ट्रस्ट से जुड़े सदस्यों ने इस कार्यक्रम को शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शहरों- अंबाला, फरीदाबाद, गुरुग्राम, दिल्ली, जालंधर, बरेली, वसुंधरा आदि स्थानों पर कार्यरत सतयुग दर्शन संगीत कला केंद्रों से आए बाल युवा कलाकारों एवं विद्यार्थियों ने भरतनाट्यम, सूफी नृत्य, भांगड़ा, माइम एवं अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से “समभाव-समदृष्टि” का संदेश प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। संगीत प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मानव जीवन के यथार्थ उद्देश्य पर विचार करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि अविलम्ब आत्मज्ञान प्राप्त करने में जुट जाओ और मानवता का स्वाभिमान बन जाओ।
कार्यक्रम में दिखाई गयी नृत्य नाटिका के प्रारम्भ एक प्रभावशाली प्रश्न से हुआ —“इंसान इस दुनिया में क्या करने आया है?” उसमें बताया गया कि मानव जीवन केवल कामुक भाव-स्वभाव अपना भौतिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं है, बल्कि आत्मज्ञान प्राप्त करना, अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानना तथा परमार्थ के मार्ग पर चलना इसका वास्तविक उद्देश्य है। कलाकारों एवं विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों को उपस्थित दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से सराहा।
“वैल्यू योर वर्च्युज़ प्रतियोगिता” के विजेताओं को सम्मानित कर उनके उत्कृष्ट प्रयासों को नमन किया गया। समारोह में उन प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया जिन्होंने 12वें अंतर्राष्ट्रीय मानवता ओलंपियाड (IHO), “स्पिरिचुअल एलॉक्वेंस” यानि आध्यात्मिक वाक्पटुता तथा “स्पिरिचुअल इकोस” यानि आध्यात्मिक प्रतिध्वनि कार्यक्रमों में अद्वितीय प्रदर्शन करते हुए मानवीय मूल्यों का संवर्धन किया। देशभर से आये प्रतिभागियों को उनके उत्कृष्ट योगदान हेतु सम्मानित किया गया, जिनमें राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख विजेता पुष्प श्रेणी में पश्चिम बंगाल से संचिता साहू, हरियाणा से कुणाल कुमार व अक्षिता शर्मा, दिल्ली से जानवी व सुगम परिहार और जम्मू-कश्मीर से अरनवी मिश्रा; अंकुर में उत्तराखंड से इशरा अंसारी, चंडीगढ़ से सरयू कोचर, दिल्ली से अनूप कुमार और हरियाणा से जानवी विजेता रहे।
वहीं तरुवर श्रेणी में हरियाणा से रीना सैनी तथा दरख्त श्रेणी में हरियाणा से गुजरी भारद्वाज व रूद्र शेखर को उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों को भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए बधाई दी गई और यह रेखांकित किया गया कि शिक्षण संस्थान समर्पित, जागरूक एवं गुणनिष्ठ विद्यार्थियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम में यह आह्वान भी किया गया कि मानव जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझते हुए अधिक से अधिक लोग कुदरत द्वारा जगह-जगह खुलने जा रहे समभाव-समदृष्टि के निःशुल्क स्कूलों तथा सतयुग दर्शन ट्रस्ट (रजि.)की गतिविधियों से ऑफलाइन व सतयुग दर्शन ट्रस्ट की एप(जो की प्ले स्टोर व एप्प स्टोर पर उपलब्ध है) से ऑनलाइन जुड़ें। इन स्कूलों के माध्यम से करवाई जाने की आत्मिक ज्ञान की पढ़ाई द्वारा मानवता, सदाचार एवं परमार्थ के मूल्यों को अपने जीवन में धारण करें। इस अवसर पर सभी के लिए यही मंगलकामना की गई कि प्रत्येक मानव अपने वास्तविक स्वरूप को पहचाने, समभाव-समदृष्टि को जीवन में धारण करे और अपने जीवन के परम लक्ष्य मोक्ष की ओर अग्रसर हो। कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
