12 फरवरी की हड़ताल के लिए कर्मचारी मजदूर तैयार, हड़ताल को मिलेगी भारी सफलता : शास्त्री

बिजली संशोधन बिल के खिलाफ देशभर के 27 लाख बिजली कर्मी हड़ताल में होंगे शामिल : लांबा

फरीदाबाद। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के राज्य प्रधान नरेश कुमार शास्त्री ने कहा है कि केंद्र और राज्य सरकार की जन एवं कर्मचारी व मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ 12 फरवरी की राष्ट्रीय हड़ताल के लिए राज्य कर्मचारी व मजदूर तैयार है। उन्होंने दावा किया कि हड़ताल को राज्य में भारी सफलता मिलेगी। क्योंकि सरकार हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद ठेका कर्मचारियों को पक्का नहीं कर रही है और ना ही पुरानी पेंशन बहाली,अलग से वेतन आयोग का गठन और पांच हजार रुपए अंतरिम राहत देने,18 महीने के बकाया डीए डीआर का भुगतान करने जैसी अत्यंत महत्वपूर्ण मांगों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने यह दावा मंगलवार को नगर निगम कांफ्रेंस हॉल में आयोजित पत्रकार वार्ता में बोलते हुए किया। उन्होंने कहा कि सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की 6 टीमों और विभागीय संगठनों की सैकड़ों टीमों ने 2 से 10 फरवरी तक राज्य में कर्मचारियों से सीधा संपर्क करने के लिए व्यापक अभियान चलाया है।

इसलिए कर्मचारी 12 फरवरी की हड़ताल के लिए पूरी तरह तैयार है और लाखों की तादाद में भाग लेंगे। पत्रकार वार्ता में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा, सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के जिला प्रधान करतार सिंह, सचिव बलबीर सिंह बालगुहेर, एएचपीसी वर्कर यूनियन के राज्य वरिष्ठ उपाध्यक्ष शब्बीर अहमद गनी आदि नेता मौजूद थे।  उन्होंने कहा कि 11 फरवरी को सभी जिलों और ब्लाकों में हड़ताल की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए झंडों के साथ मोटरसाइकिल जुलूस निकाले जाएंगे। अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि इस हड़ताल का आह्वान देश की दस केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों और केंद्र एवं राज्य सरकार के कर्मचारी संगठनों ने संयुक्त रूप से किया है। उन्होंने बताया कि देशभर में 50 लाख से ज्यादा केन्द्र एवं राज्य कर्मचारी हड़ताल करेंगे। बिजली संशोधन बिल और न्यूक्लियर एनर्जी कानून (शांति) के खिलाफ देशभर के बिजली कर्मचारी और इंजीनियर (एनसीसीओईईई) के आह्वान पर 12 फरवरी को हड़ताल करेंगे।

उन्होंने कहा कि सरकार नव उदारवादी आर्थिक नीतियों को आक्रमकता के साथ लागू कर रही है और इनके खिलाफ पैदा हो रहे आक्रोश को संगठित होने से रोकने के लिए जाति और धर्म के आधार पर ध्रवीकरण कर रही है। सरकार जन सेवाओं का निजीकरण कर रही है और देश सरकारी विभागों और पीएसयू में खाली पड़े लगभग एक करोड़ पदों को स्थाई भर्ती से भर बेरोजगारों को रोजगार देने की बजाय फिक्स टर्म इंप्लायमेंट और ठेका आधार पर नौकरी दे रही है। सरकार तीस हजार रुपए न्यूनतम वेतन लागू करने, आशा, आंगनवाड़ी व मिड डे मील वर्करों और एनएचएम आदि केन्द्रीय परियोजनाओं में 10-15 सालों से कार्यरत कर्मचारियों को नियमित नही कर रही है। चार लेबर कोड्स के द्वारा सरकार मजदूरों को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने जा रही है। उन्होंने बताया कि इस राष्ट्रीय हड़ताल का संयुक्त किसान मोर्चा, अखिल भारतीय राज्य सरकारी पेंशनर्स फेडरेशन,जनवादी महिला समिति, जनवादी नौजवान सभा, स्टुडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया, कंस्ट्रक्शन वर्कर फेडरेशन ऑफ इंडिया आदि सैकड़ों संगठनों ने समर्थन किया है।

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