भारतीय लोकतंत्र की आत्मा—भारतीय संविधान—के मूल्यों को जन–जन तक पहुँचाने और नागरिक चेतना को सशक्त करने के उद्देश्य से विश्वरूप एजुकेशन द्वारा एक विशेष वैचारिक संवाद कार्यक्रम “संविधान पर चर्चा” का आयोजन किया है। यह कार्यक्रम संविधान के मूल सिद्धांतों, लोकतांत्रिक जिम्मेदारियों तथा सक्रिय नागरिक भागीदारी पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग को संविधान की आत्मा से जोड़ना है।
कार्यक्रम में संविधान एवं लोकतांत्रिक विमर्श के सुविख्यात वक्ता मुकेश भारद्वाज अपने विचार प्रस्तुत करा । उनका संबोधन विशेष रूप से युवाओं, शिक्षकों, अभिभावकों एवं जागरूक नागरिकों के लिए प्रेरणादायी रहा । अपने वक्तव्य में वे संविधान की वर्तमान प्रासंगिकता, उसके मूल आदर्शों तथा लोकतंत्र में नागरिक की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला । यह संवाद युवाओं में संवैधानिक मूल्यों के प्रति समझ विकसित करने और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करा ।
कार्यक्रम का मूल संदेश—
“जन–जन की आवाज़, संविधान हम सबकी पहचान” रहा ।
लोकतंत्र में प्रत्येक नागरिक की सहभागिता, अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के संतुलित निर्वहन तथा संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। यह संदेश स्पष्ट करता है कि लोकतंत्र की मजबूती केवल संस्थाओं से नहीं, बल्कि सजग, जागरूक और उत्तरदायी नागरिकों से सुनिश्चित होती है।
यह कार्यक्रम होटल ली मेरिडियन, इंस्पायर हॉल, नई दिल्ली में शाम 3:00 बजे से 5:00 बजे तक आयोजित किया गया ।
कार्यक्रम की सुविधाकर्ता श्रीमती इंदु वर्मा, प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं एकेडमिक निदेशक, सिद्धार्थ पब्लिक स्कूल हैं। उनके मार्गदर्शन में यह आयोजन एक अनुशासित, प्रभावशाली एवं विचारोत्तेजक मंच के रूप में आयोजित किया जा रहा है, जहाँ संवाद, चिंतन और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सार्थक चर्चा हुई ।
कार्यक्रम के आयोजन में विभिन्न सामाजिक एवं शैक्षणिक संगठनों का सहयोग प्राप्त हुआ । अर्पित मित्तल (प्रांत संयोजक), कु. कीर्ति सिंह (प्रांत सहसंयोजक) तथा तनुज कटारिया (गुरुग्राम महानगर सहमंत्री, अभाविप) द्वारा इस वैचारिक संवाद को सक्रिय समर्थन प्रदान किया गया ।
इस अवसर पर ‘ॐ टीम’ की ओर से रश्मि चौकसे राय संविधान पर अपने विचार रखा । उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान केवल नियमों और धाराओं का संकलन नहीं, बल्कि भारत की जीवंत आत्मा है। यह हमें समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व जैसे मूल्यों का संदेश देता है तथा अधिकारों के साथ कर्तव्यों के पालन का भी बोध कराता है। आज के बदलते वैश्विक परिदृश्य में संविधान हमें यह स्मरण कराता है कि सत्ता का वास्तविक केंद्र जनता है और शासन का सर्वोच्च उद्देश्य सेवा है।
कार्यक्रम के उपरांत प्रतिभागियों के लिए हाई-टी की व्यवस्था भी की गई । यह संवाद उन सभी नागरिकों के लिए एक खुला आमंत्रण है, जो संविधान को केवल कानून की पुस्तक नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक चेतना और नैतिक दिशा का आधार मानते हैं।
