सूरजकुंड मेले में दिखा दक्षिण भारत की चित्रकला का वैभव, 12 लाख रुपये की तंजौर पेंटिंग बनी आकर्षण का केंद्र

फरीदाबाद । फरीदाबाद की सुरम्य अरावली पहाडय़िों में आयोजित 39वां सूरजकुंड अंतरराष्टï्रीय आत्मनिर्भर शिल्प मेला कला प्रेमियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। मेले में देश-विदेश की विविध संस्कृतियों के बीच दक्षिण भारत की पारंपरिक चित्रकला अपनी अमिट छाप छोड़ रही है। इस वर्ष स्टॉल नंबर 917 पर तमिलनाडु से आए शिल्पकार केशव की तंजौर पेंटिंग पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

सोने और रत्नों से सजी तिरुपति बालाजी की 12 लाख की पेंटिंग :
शिल्पकार केशव के स्टॉल पर 12 हजार रुपए से लेकर 12 लाख रुपए तक की बेशकीमती पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं। तिरुपति बालाजी की 12 लाख रुपए की कीमत वाली पेंटिंग अपनी सूक्ष्म कारीगरी, शुद्ध सोने की पन्नी के काम और कीमती रत्नों के जुड़ाव के कारण मेले की सबसे महंगी और भव्य कलाकृतियों में से एक है, जो मेले में आकर्षण का केंद्र बनी है।

शिल्पकार केशव ने बताया कि तंजौर चित्रकला तमिलनाडु की 16वीं शताब्दी की एक प्रसिद्ध पारंपरिक कला शैली है। इस कला में चित्रों में शुद्ध सोने की पन्नी और कीमती रत्नों का उपयोग किया जाता है। उन्होंने बताया कि लकड़ी के तख्तों पर बनाई जाने वाली इन पेंटिंग्स में उभरी हुई नक्काशी इन्हें एक शानदार त्रि-आयामी रूप देती है। इस कला में  पेंटिंग्स मुख्य रूप से हिंदू देवी-देवताओं को जीवंत और आध्यात्मिक रूप में दर्शाती हैं।

पर्यटकों का उमड़ा हुजूम :
प्राचीन भारतीय चित्रकला की इस अनूठी विरासत को देखने के लिए पर्यटकों की भारी भीड़ स्टॉल नंबर 917 पर उमड़ रही है। लोग न केवल इन पेंटिंग्स की सुंदरता को निहार रहे हैं, बल्कि इस कठिन और बारीकी वाली कला को करीब से समझने में भी रुचि दिखा रहे हैं।

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