सूरजकुंड के मंच पर बिखरा गुरदास मान की गायकी का जादू

शहीद पुलिस इंस्पेक्टर को भावपूर्ण श्रद्धांजलि देकर की गई कार्यक्रम की शुरुआत

फरीदाबाद। अरावली की सुंदर वादियों में चल रहे 39वें अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या उस समय यादगार बन गई, जब पंजाबी गीतकार गुरदास मान ने अपनी सुरीली आवाज की प्रस्तुति से समां बांध दिया। मंच संभालते ही गुरदास मान ने सबसे पहले मेले में हुए दुखद झूला हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने कर्तव्य पालन के दौरान अपनी जान गंवाने वाले शहीद पुलिस इंस्पेक्टर जगदीश प्रसाद को श्रद्धांजलि अर्पित की और हादसे में घायल हुए पर्यटकों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। उनकी इस भावुक अपील ने महा चौपाल में मौजूद हर दर्शक के दिल को छू लिया। इसके साथ ही उन्होंने ड्यूटी के प्रति कर्तव्य निष्ठï देश के जवानों तथा अधिकारी व कर्मचारियों को समर्पित देशभक्ति गीत के साथ अपने कार्यक्रम की शुरूआत की।

इसके बाद जैसे ही पंजाबी कलाकार गुरदास मान ने अपने पारंपरिक अंदाज में गायकी शुरू की, पूरा परिसर तालियों की गडगड़़ाहट से गूंज उठा। उन्होंने अपनी प्रस्तुति का आगाज़ धार्मिक और सूफियाना रंग में डूबे गीत जे देखना तेरी रहमत, बल्ले-बल्ले से किया। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक अपने सुपरहिट गीत दिल दा मामला है…, छल्ला… , पीठ तेरी जान दी…, रातों को उठ-उठ के… सहित अन्य गीतों को झड़ी लगा दी। जिन पर दर्शक झूमने नजर आए। गुरदास मान की कलाकारी का जादू ऐसा चला कि दर्शक अपनी सीटों से उठकर नाचने को मजबूर हो गए।

गीतों के बीच-बीच में उनके द्वारा सुनाए गए शेरो-शायरी के अंशों ने कार्यक्रम में चार चाँद लगा दिए। उनकी गायकी ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर जीवंत कर दिया।  सांस्कृतिक संध्या के अंत में पंजाबी कलाकार गुरदास मान को डीसीपी मकसूद अहमद, पर्यटन निगम के एजीएम एवं मेला के नोडल अधिकारी हरविंद्र सिंह यादव,एजीएम राजपाल द्वारा स्मृति चिह्न व शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर पंजाबी कलाकार गुरदास मान ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी व पर्यटन मंत्री डॉ अरविंद कुमार  शर्मा का आभार जताया। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार द्वारा कलाकारों को दिया जा रहा यह प्रोत्साहन न केवल उन्हें नई ऊर्जा देता है, बल्कि कला को जीवित रखने में भी सहायक सिद्ध होता है।

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