हरियाणा सरकार विधानसभा में विधेयक लाकर लेबर कोड्स के मजदूर-विरोधी प्रावधान हटाए : सीटू
फरीदाबाद। सीटू हरियाणा ने मांग की है कि हरियाणा सरकार संविधान की समवर्ती सूची में श्रम संबंधी अपने अधिकारों का प्रयोग करते हुए विधानसभा में विधेयक लाकर केंद्र के चारों लेबर कोड्स में शामिल मजदूर-विरोधी प्रावधानों को हटाए। श्रम विभाग हरियाणा द्वारा आज चंडीगढ़ मुख्यालय में लेबर कोड्स के नियमों पर चर्चा के लिए आयोजित बैठक में सीटू प्रतिनिधिमंडल ने लिखित रूप में अपनी आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत किए। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश महासचिव जय भगवान, सचिव सुनील दत्त तथा उपाध्यक्ष सतीश सेठी शामिल थे। विभाग की ओर से अतिरिक्त श्रम आयुक्त अनुराधा लांबा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
सीटू नेताओं ने कहा कि 29 श्रम कानूनों को समाप्त कर चार लेबर कोड्स लागू करना नियोक्ताओं के पक्ष में और मजदूरों के अधिकारों पर गंभीर हमला है। ठेका मजदूरों के हितों की रक्षा करने वाले प्रावधान कमजोर किए गए हैं, हड़ताल के अधिकार को सीमित किया गया है और ट्रेड यूनियनों के गठन व अस्तित्व पर भी हमले किए गए हैं। उन्होंने कहा कि फिक्स्ड टर्म रोजगार, श्रम न्यायालयों को कमजोर करना, निरीक्षण व्यवस्था में ढील, अधिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों को सुपरवाइजरी श्रेणी में शामिल करना तथा सामाजिक सुरक्षा और श्रम कल्याण बोर्डों के अधिकारों में कटौती जैसे प्रावधान देश के करोड़ों कामगारों को बुनियादी श्रम अधिकारों से वंचित कर देंगे। सीटू ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, श्रम मंत्री और श्रम विभाग के अधिकारियों को ज्ञापन देकर मांग की है कि हरियाणा सरकार संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य को प्राप्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए मजदूर-विरोधी प्रावधानों में आवश्यक संशोधन करे। सीटू ने चेतावनी दी कि मजदूरों के अधिकारों और जीवन-यापन पर लगातार हमले भविष्य में व्यापक मजदूर संघर्ष का आधार बनेंगे।
